Journo Mirror
India

हल्द्वानी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी, UAPA लगाने पर जताया ‘गंभीर संदेह’

नई दिल्ली, 1 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी हिंसा मामले में आरोपी अब्दुल मलिक को मिली जमानत के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाए जाने पर उसे “गंभीर संदेह” है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसके तहत अब्दुल मलिक को जमानत दी गई थी। अदालत ने माना कि हाईकोर्ट के आदेश में कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन केवल उसी आधार पर जमानत रद्द नहीं की जा सकती।

यह मामला 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस ने अब्दुल मलिक पर भारतीय दंड संहिता, UAPA, शस्त्र अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि घटना के समय मलिक घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।

उनके बेटे अब्दुल मोईद सहित एक अन्य सह-आरोपी को भी पहले ही जमानत मिल चुकी है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने राज्य सरकार से सवाल किया, “यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है, तो क्या केवल इसी आधार पर UAPA लगा दिया जाएगा?” उन्होंने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं और हर हिंसक घटना को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं हो सकता।

पीठ ने यह भी कहा कि उसे इस मामले में UAPA जोड़े जाने पर “गंभीर संदेह” है। अदालत ने मुकदमे की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति बागची ने राज्य सरकार से कहा, “अगर आरोप इतने गंभीर थे तो दो साल के भीतर दोषसिद्धि हो जानी चाहिए थी। यदि पुलिस का मनोबल आपकी चिंता है, तो समय पर मुकदमा पूरा करना भी आपकी जिम्मेदारी है, जिसमें आप विफल रहे हैं।”

गौरतलब है कि फरवरी 2024 में हल्द्वानी में एक मदरसे को गिराए जाने के विरोध में प्रदर्शन हुए थे, जो बाद में हिंसक हो गए। घटना में कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई थीं। मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों को असमान रूप से निशाना बनाया गया।

Related posts

Leave a Comment