पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के 66 वर्षीय मुस्लिम कृषि मजदूर जलील अख्तर को मंगलवार को करीब तीन महीने बाद जेल से रिहा कर दिया गया। उन्हें पुलिस के उस दावे के आधार पर हिरासत में लिया गया था कि वह बांग्लादेशी नागरिक हैं। हालांकि, उनके परिवार ने इस दावे को खारिज करते हुए उन्हें भारतीय नागरिक बताया था।
परिवार के मुताबिक, जलील अख्तर पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के रहने वाले हैं और लंबे समय से वहीं रहकर कृषि मजदूरी करते हैं। उनकी पहचान और नागरिकता साबित करने के लिए परिवार ने उनका मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और चुनावी रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज अधिकारियों के सामने पेश किए।
परिवार का कहना था कि इन दस्तावेजों से जलील अख्तर की भारतीय नागरिकता और स्थानीय निवासी होने की पुष्टि होती है। इसके बावजूद उन्हें लगभग तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर परिवार को लगातार उनकी रिहाई की उम्मीद थी।
मंगलवार को जलील अख्तर को जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। मामले ने एक बार फिर उन लोगों की पहचान और नागरिकता को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर ध्यान खींचा है, जिनके पास भारतीय नागरिक होने के दस्तावेज मौजूद हैं।
जलील अख्तर के परिवार ने कहा कि एक बुजुर्ग मजदूर को बिना पर्याप्त आधार के विदेशी नागरिक बताए जाने से उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने उनके भारतीय नागरिक होने से जुड़े दस्तावेजों को ही उनकी पहचान का आधार बताया है।

