नई दिल्ली: एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने छत्तीसगढ़ सरकार के उस आदेश की कड़ी आलोचना की है, जिसमें सरकारी स्कूलों में कुछ हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों को दैनिक गतिविधियों के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया है। संगठन ने राज्य सरकार से इस परिपत्र को तत्काल वापस लेने या संशोधित करने की मांग की है।
APCR द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, गुरु मंत्र, शांति मंत्र और दीप प्रज्ज्वलन जैसी गतिविधियों को नियमित कार्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया है। संगठन का कहना है कि यह आदेश संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत है और शिक्षा तथा धार्मिक आस्था के बीच की सीमाओं को धुंधला करता है।
APCR ने कहा कि राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत और महान व्यक्तित्वों के जीवन से जुड़े पाठ जैसी गतिविधियां शैक्षणिक दृष्टि से उचित हैं, लेकिन किसी एक धर्म से जुड़े अनुष्ठानों को सभी छात्रों पर अनिवार्य करना संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है। संगठन के अनुसार, सरकारी स्कूल सभी समुदायों के बच्चों के लिए होते हैं, इसलिए किसी छात्र को उसकी आस्था से अलग धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
संगठन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य किसी विशेष धर्म को बढ़ावा नहीं दे सकता और न ही धर्म के आधार पर किसी नागरिक के साथ भेदभाव कर सकता है। APCR का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारियों का दायित्व शिक्षा व्यवस्था की निगरानी करना है, न कि धार्मिक प्रथाओं को लागू कराना।
APCR ने राज्य सरकार से आदेश वापस लेने की मांग करते हुए नागरिक समाज, शिक्षकों, अभिभावकों और संवैधानिक विशेषज्ञों से भी इस मुद्दे पर आगे आने की अपील की है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को समावेशी, गैर-भेदभावपूर्ण और संविधान के मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


