उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद संभागीय आयुक्त की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई तक विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
संभागीय आयुक्त अंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से दायर अंतरिम राहत याचिका स्वीकार कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अगले आदेश तक किसी भी भवन को ध्वस्त नहीं किया जाएगा और सभी पक्षों की दलीलें तथा दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। सोमवार को मुरादाबाद में एक वकील के निधन पर आयोजित शोकसभा के कारण सुनवाई भी स्थगित रही।
यह राहत ऐसे समय मिली है जब विश्वविद्यालय के छात्र ध्वस्तीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आंदोलन अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय को बचाया जाए और ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाए।
विश्वविद्यालय के संस्थापक आज़म खान की पत्नी और पूर्व राज्यसभा सांसद तज़ीन फातिमा ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय के पक्ष में नहीं आता है तो वे इलाहाबाद हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को संविधान के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है और सरकार विश्वविद्यालय का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले सकती।
तज़ीन फातिमा ने कहा कि छात्रों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि यदि परिसर को नुकसान भी पहुंचता है तो वे पेड़ों के नीचे और खुले मैदान में बैठकर भी अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। वहीं, आज़म खान के करीबी सहयोगी आसिम राजा ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन विश्वविद्यालय को गिराने की कोशिश करता है तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
गौरतलब है कि 15 जुलाई को रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर 40 में से 38 इमारतों को 15 दिनों के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया था।
प्राधिकरण का आरोप है कि इन इमारतों का निर्माण उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत आवश्यक स्वीकृति के बिना किया गया है। इस आदेश के बाद से छात्र, समाजवादी पार्टी और कई सामाजिक संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

