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‘मैं लड़ता रहा, पीछे देखा तो मेरी पार्टी ने लड़ाई छोड़ दी’, रूहुल्लाह मेहदी का अपनी ही पार्टी पर हमला

श्रीनगर। श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने अपनी ही पार्टी के रुख पर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में रूहुल्लाह मेहदी ने कहा कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संघर्ष किया, लेकिन हर बार पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें अपनी पार्टी की ओर से लड़ाई छोड़ दी गई नजर आई।

रूहुल्लाह मेहदी ने 5 अगस्त 2019 का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन BJP और RSS की ओर से जम्मू-कश्मीर पर थोपे गए “अलोकतांत्रिक बदलावों” के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया था। लेकिन उनके मुताबिक, जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो उनकी पार्टी इस लड़ाई को छोड़ चुकी थी।

उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक का मुद्दा उठाते हुए भी अपनी पार्टी की आलोचना की। मेहदी ने कहा कि उन्होंने इस विधेयक के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी, लेकिन इस बार भी पीछे देखने पर उनकी पार्टी ने संघर्ष छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव तक लाने का साहस नहीं जुटा सकी, जबकि पंजाब और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने इसके खिलाफ कदम उठाए।

वंदे मातरम् को लेकर भी रूहुल्लाह मेहदी ने अपनी पार्टी के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने वंदे मातरम् के कुछ अंशों को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया क्योंकि उनके अनुसार ऐसा करना संविधान के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर संघर्ष छोड़ने के साथ-साथ BJP और RSS के सामने “समर्पण” करते हुए उसी दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

रूहुल्लाह मेहदी ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब अल्पसंख्यकों को लगातार दबाव में रखा जा रहा है, BJP और RSS के “सांप्रदायिक हमले” को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि देशभर में अल्पसंख्यकों की जायज चिंताओं के लिए कोई आवाज नहीं उठाएगा तो उनके लिए कौन खड़ा होगा।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत का सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल क्षेत्र है, जिसे दूसरे शब्दों में “अल्पसंख्यक-बहुल” क्षेत्र भी कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति जम्मू-कश्मीर को धार्मिक अल्पसंख्यकों की भावनाओं और चिंताओं के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाती है।

मेहदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास सही मुद्दों के लिए खड़े होने का एक ऐतिहासिक अवसर है और इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय कठिन है और ऐसे दौर में राजनीतिक नेतृत्व से समझदारी, संवेदनशीलता और साहस की जरूरत है, न कि एक और समझौते की।

रूहुल्लाह मेहदी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में वक्फ कानून, धार्मिक मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उनके बयान को अपनी ही पार्टी के रुख के प्रति सार्वजनिक असहमति के तौर पर देखा जा रहा है।

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