ईरान के वरिष्ठ नेता और पूर्व आईआरजीसी कमांडर ने दावा किया है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं और देश की जनता अमेरिका को पीछे हटने और आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर देंगी। उन्होंने अमेरिकी नीतियों को “दबाव और धमकी की विफल रणनीति” बताया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिए गए बयान में रेजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमले की समयसीमा तय करना और फिर उसे टाल देना वाशिंगटन की “कमजोरी और अस्थिरता” को दिखाता है।
रेजाई का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियान की तैयारी की थी, लेकिन खाड़ी देशों के नेताओं की अपील के बाद उसे फिलहाल टाल दिया गया। हालांकि अमेरिकी सेना को अब भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश पर लगाए गए प्रतिबंध और दबाव की नीति विफल रही है।
रेजाई ने कहा कि ईरान तब तक किसी नई बातचीत में शामिल नहीं होगा जब तक उस पर लगाए गए प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटाए जाते और कथित आक्रामक कार्रवाइयों का अंत नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि बदलते वैश्विक हालात में अमेरिकी प्रभुत्व कमजोर हो रहा है।
इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं।

