अजमेर शरीफ़ दरगाह से जुड़े धर्मगुरु ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और देशभर में गायों के वध तथा कुर्बानी के लिए उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह अपील ईद-उल-अधा (बकरीद) से पहले सामने आई है।
चिश्ती ने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस संबंध में कानून लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गाय हिंदू समाज की आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है और उसे संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह देखना जरूरी है कि इस तरह के विधेयक का समर्थन कौन करता है और विरोध कौन करता है।” चिश्ती ने इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक सम्मान के दृष्टिकोण से देखने की बात कही। उनका दावा था कि यदि इससे सामाजिक सद्भाव मजबूत होता है तो कई मुसलमान भी इसका समर्थन करेंगे।
धर्मगुरु ने परित्यक्त मवेशियों की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दूध देना बंद करने के बाद कई गायों को सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे वे प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हो जाती हैं। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त कानून और दंड की मांग की।
इसके साथ ही चिश्ती ने गौ-रक्षा के नाम पर होने वाली भीड़ हिंसा और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने की घटनाएं चिंताजनक हैं और गोमांस निर्यात पर भी देशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार की भी आलोचना की और कहा कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद पशु संरक्षण को लेकर कठोर कानून लागू नहीं किए गए हैं।

