कतर में जारी युद्धविराम वार्ता के बीच अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई “आत्मरक्षा” के तहत की गई, क्योंकि ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों और समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा हो रहा था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट्स और उन नौकाओं को निशाना बनाया गया जो कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्री खदानें बिछाने की तैयारी कर रही थीं।
CENTCOM के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने को मजबूर हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक, हमले बंदर अब्बास, सिरिक और जास्क के आसपास हुए। ईरानी मीडिया ने कई विस्फोटों की पुष्टि की, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बंदरगाहों पर सामान्य कामकाज जारी है और तेल आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है।
यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कतर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत जारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि वार्ता में “काफी प्रगति” हुई है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की जा सकती।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल बातचीत का मुख्य मुद्दा सैन्य टकराव रोकना और क्षेत्रीय तनाव कम करना है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर बाद में चर्चा हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों को इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाने वाले “अब्राहम समझौते” में शामिल होना चाहिए।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम को या तो अमेरिका के हवाले किया जाए या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट किया जाए। हालांकि, खाड़ी देशों ने दोहराया है कि इजरायल के साथ सामान्य संबंध तभी संभव हैं जब स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना हो।

