उत्तराखंड के देहरादून स्थित थानो क्षेत्र में जामा मस्जिद को सील किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का आरोप है कि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने अदालत के आदेश की सीमा से बाहर जाकर पूरे मस्जिद परिसर को सील कर दिया, जबकि अदालत का निर्देश केवल मस्जिद परिसर के एक 20×40 फुट हिस्से तक सीमित था।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पूरे परिसर को सील किए जाने से मस्जिद और उससे जुड़ी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बाधित हो गई है। समुदाय का आरोप है कि प्रशासन ने कुछ हिंदुत्व संगठनों के दबाव में यह कार्रवाई की और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब काली सेना के राज्य संयोजक भूपेश जोशी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मस्जिद परिसर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उन्होंने मस्जिद प्रतिनिधि आसिम अली से कहा कि 1 जून तक मस्जिद खाली कर दी जाए, अन्यथा संगठन स्वयं कार्रवाई करेगा।
इस दौरान हुई बातचीत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी मौजूद दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जामा मस्जिद थानो कई दशकों से क्षेत्र में मौजूद है और यहां लगभग 10 से 15 मुस्लिम परिवार नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं। निवासी कासिम अली के अनुसार, मस्जिद वर्ष 1978 से अस्तित्व में है और इसका पंजीकरण 2017 में कराया गया था। उनका दावा है कि मस्जिद से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं तथा 1992 के बंदोबस्त अभिलेखों में भी इसका उल्लेख दर्ज है।
समुदाय के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संगठन मस्जिद को लेकर यह दावा कर रहे हैं कि यहां मदरसा संचालित किया जाता है, जबकि उनके अनुसार यह आरोप पूरी तरह निराधार है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को यदि कोई कार्रवाई करनी थी तो उसे केवल उस हिस्से तक सीमित रखना चाहिए था जिसका उल्लेख कानूनी कार्यवाही में किया गया था। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मामले में आगे कानूनी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है और पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

