कर्नाटक सरकार द्वारा शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाने के बाद हुबली में नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदुत्व संगठन श्री राम सेना के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कई कॉलेजों में छात्रों के बीच भगवा शॉल वितरित किए। संगठन ने इसे सरकार के उस फैसले के विरोध के रूप में बताया, जिसमें छात्रों को स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हुबली के कनकदासा कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल बांटे गए। इससे पहले श्री राम सेना के संस्थापक प्रमोद मुथालिक ने घोषणा की थी कि यदि सरकार हिजाब की अनुमति देती है तो संगठन पूरे कर्नाटक में छात्रों को भगवा शॉल वितरित करेगा।
दरअसल, कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी 2022 को तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा जारी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके तहत कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई थी।
नए दिशा-निर्देशों में हिजाब, पगड़ी, जनेऊ, रुद्राक्ष और अन्य पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को अनुमति दी गई है, बशर्ते वे अनुशासन, सुरक्षा और पहचान संबंधी नियमों को प्रभावित न करें।
हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भगवा शॉल को अनुमत पोशाकों में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा था कि शैक्षणिक संस्थानों में भगवा शॉल पहनने की अनुमति नहीं होगी।
इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि यह विचार किया जाएगा कि शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल की आवश्यकता है या किसी राष्ट्रीय प्रतीकात्मक शॉल की।
लेखक अपूर्वानंद ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगवा शॉल पहनना पारंपरिक हिंदू प्रथा का हिस्सा नहीं रहा है और इसे हिंदुत्व राजनीति से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि 2022 में कर्नाटक में हिजाब विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद राजनीतिक रूप से प्रेरित था और इससे मुस्लिम छात्राओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। वहीं, हिजाब पर प्रतिबंध हटाने के बाद अब भगवा शॉल को लेकर नया विवाद सामने आ गया है।

