कोलकाता, 8 जून 2026: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (जेआईएच) और एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य विधानसभा चुनावों के बाद राज्य की जमीनी स्थिति का आकलन करना और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं को समझना है।
प्रतिनिधिमंडल में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान, एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान, जेआईएच पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसीहुर रहमान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कोलकाता के टॉपसिया क्षेत्र का दौरा किया और उन परिवारों से मुलाकात की जो प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित हो सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि विधानसभा चुनाव परिणामों के तुरंत बाद टॉपसिया में बुलडोजर अभियान चलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थानीय विरोध और अदालत के स्थगन आदेश के बाद कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया। इसके बावजूद हजारों परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, पर्याप्त कानूनी सुरक्षा उपायों के अभाव में लगभग 15,000 लोगों के बेघर होने का खतरा बना हुआ है। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद और एपीसीआर ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हर संभव कानूनी और नैतिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
टॉपसिया में स्थानीय निवासियों को संबोधित करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने कहा कि संगठन प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है और उन्हें पूरा सहयोग देगा। वहीं एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान ने प्रभावित परिवारों और वकीलों के साथ कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए भविष्य की न्यायिक कार्यवाही में कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया।
कोलकाता में विभिन्न मुस्लिम संगठनों के नेताओं की एक परामर्श बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें पश्चिम बंगाल के कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में साझा मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने के लिए एक संयुक्त नेटवर्क बनाने का निर्णय लिया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने मालदा क्षेत्र में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं और चिंताएं साझा कीं। इन कार्यक्रमों में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के जिला एवं स्थानीय पदाधिकारियों के साथ-साथ एसआईओ, जीआईओ और सॉलिडेरिटी मूवमेंट के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
इसके अतिरिक्त मालदा में वकीलों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने अल्पसंख्यक बहुल जिलों मुर्शिदाबाद, नदिया और बीरभूम का भी दौरा किया तथा स्थानीय निवासियों और बुद्धिजीवियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से जाना।
इस अवसर पर मलिक मोतासिम खान ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्य के सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करे और उन्हें कानूनी सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करे। उन्होंने कहा कि बंगाल की प्रगति और समृद्धि न्याय, समानता और सभी नागरिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है।

