पश्चिम बंगाल के चर्चित जहांगीर खान मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाज़ा खटखटाया गया है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इस्लामिक स्कॉलर हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए जहांगीर खान के साथ कथित हिरासत के दौरान सार्वजनिक अपमान और मानवाधिकार उल्लंघन की स्वतंत्र जांच की मांग की है। शिकायत प्राप्त होने के बाद NHRC ने इसे डायरी नंबर 13814/IN/2026 के तहत दर्ज किया है।
हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से यह मामला राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी भी आरोपी को कानून लागू करने के नाम पर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन यदि हिरासत के दौरान उसे सार्वजनिक रूप से इस तरह पेश किया जाता है जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो, तो यह संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत किसी व्यक्ति का बचाव करने के लिए नहीं, बल्कि इस सिद्धांत की रक्षा के लिए है कि “कानून का शासन किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का अधिकार नहीं देता।
उन्होंने NHRC से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने तथा यदि मानवाधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा, आज मुद्दा केवल जहांगीर खान का नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या भारत में हर आरोपी की मानवीय गरिमा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित रहेगी। मानवाधिकार किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या अलोकप्रियता पर निर्भर नहीं करते। लोकतंत्र में कानून के शासन और मानवीय गरिमा—दोनों की समान रूप से रक्षा होना आवश्यक है।

