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जंतर-मंतर पहुंचे संतों ने छात्र आंदोलन को दिया समर्थन, सरकार से संवाद की अपील

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल को सोमवार को संत समाज का भी समर्थन मिला। सत्य धर्म संवाद के संयोजक स्वामी राघवेन्द्र के नेतृत्व में संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन स्थल पहुंचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का अनशन लगातार जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। संतों ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई सार्थक पहल नहीं दिखाई दी है। उनका कहना था कि नीट परीक्षा विवाद के बाद देशभर के छात्र-छात्राओं में गहरा आक्रोश है और जंतर-मंतर पर उठ रही उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

हरिद्वार स्थित मातृ सदन के संस्थापक एवं अध्यक्ष स्वामी शिवानंद जी ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो संत समाज भी इस जनसंघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करेगा। उन्होंने कहा कि शासन का पहला दायित्व जनता के प्रति जवाबदेह होना है और जो अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असफल हों, उन्हें नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

सत्य धर्म संवाद के संयोजक स्वामी राघवेन्द्र ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों को देशद्रोह, विदेशी एजेंडा या दुष्प्रचार कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि असहमति लोकतंत्र की आत्मा है और जब छात्र, युवा तथा नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरते हैं तो सरकार का दायित्व उनसे संवाद करना होता है, न कि उन्हें बदनाम करना।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह संघर्ष केवल छात्रों का नहीं बल्कि देश के भविष्य का संघर्ष है। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने से करोड़ों युवाओं के सपनों पर असर पड़ता है और इसी कारण वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की मांग कर रहे हैं।

ब्रह्मचारी सुधानंद ने शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। वहीं ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने कहा कि सत्याग्रह भारतीय सभ्यता की महान परंपरा है और जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण संघर्ष समाज को नई दिशा देता है। बाबा रामकेवल दास ने युवाओं की पीड़ा को समझने और उनके साथ खड़े होने को समाज तथा संत समुदाय का नैतिक दायित्व बताया।

डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना छात्रों का विश्वास दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनरत छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए सरकार से संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही का मार्ग अपनाने की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में स्वामी शिवानंद जी, ब्रह्मचारी सुधानंद, ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद, बाबा रामकेवल दास, डॉ. अजय वर्मा तथा सत्य धर्म संवाद के संयोजक स्वामी राघवेन्द्र शामिल थे।

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