रांची: झारखंड की राजधानी रांची में रविवार को आमया संगठन द्वारा भारतीय मुसलमानों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और सरकारों की भूमिका विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रेस क्लब रांची में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश के विभिन्न राज्यों में मस्जिदों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए इसकी निंदा की और इसे संवैधानिक मूल्यों के विपरीत बताया।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए आमया संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एस. अली ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 और 26 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक स्थल स्थापित करने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 भी यह सुनिश्चित करता है कि 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की जो स्थिति थी, उसे यथावत बनाए रखा जाए। उनके अनुसार हाल के महीनों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों में दो दर्जन से अधिक मस्जिदों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है।
वक्ताओं का आरोप था कि कई मामलों में संबंधित मस्जिद प्रबंधन समितियों या स्थानीय समुदाय को पर्याप्त नोटिस दिए बिना और अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किए बिना ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
परिचर्चा में वक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों का भी उल्लेख किया, जिनमें ध्वस्तीकरण जैसे मामलों में प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की बात कही गई है। उनका आरोप था कि कई मामलों में इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
मजलिस-ए-उलेमा झारखंड के अध्यक्ष मौलाना साबिर मजाहिरी और मौलाना जियाउल होदा नदवी ने विपक्षी दलों के साथ-साथ मुस्लिम सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उनसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में प्रधानमंत्री से मुलाकात करने और धार्मिक स्थलों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने के लिए हस्तक्षेप की मांग करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मस्जिदों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आमया संगठन के केंद्रीय प्रभारी जियाउद्दीन अंसारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन केंद्रीय सचिव नौशाद आलम ने दिया।
परिचर्चा में आमया संगठन के पदाधिकारियों, विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, उलेमा और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, संवैधानिक अधिकारों और कानून के समान अनुपालन पर अपने विचार रखे।

