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बृज भूषण शरण सिंह के बरी होने पर 250 से अधिक महिला संगठनों का विरोध, पहलवानों की कानूनी लड़ाई में साथ देने का ऐलान

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर के 250 से अधिक महिला संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और नारीवादियों ने संयुक्त बयान जारी कर कड़ी आपत्ति जताई है।

संगठनों ने कहा कि यह फैसला न्याय और जवाबदेही की लड़ाई को खत्म नहीं करता और वे महिला पहलवानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे. संयुक्त बयान में कहा गया कि महिला पहलवानों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में न्याय के लिए संघर्ष किया।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने उनकी कानूनी लड़ाई को “लगभग असंभव बाधाओं के खिलाफ संघर्ष” बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले के बावजूद सुरक्षित खेल वातावरण और जवाबदेही की मांग जारी रहेगी। बयान में कहा गया कि यदि जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की कानूनी लड़ाई में भी महिला पहलवानों का समर्थन किया जाएगा।

महिला समूहों ने कहा कि यह मामला केवल कुछ खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि खेल संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय का प्रश्न है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पहलवानों ने जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना दिया था और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही दिल्ली पुलिस ने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

संगठनों का आरोप है कि खिलाड़ियों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें लगातार दबाव का सामना करना पड़ा। बयान में ओलंपियन विनेश फोगाट के उस बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “पूरा प्रतिष्ठान, सरकार और व्यवस्था बृज भूषण को बचाने के लिए काम करती दिखाई दे रही है।”

महिला संगठनों ने कहा कि मुकदमे के दौरान शिकायतकर्ताओं पर भारी दबाव बनाया गया और कुछ गवाहों ने अपने बयान बदल दिए, जबकि तीन महिला पहलवान अपने आरोपों पर अंत तक कायम रहीं।

संयुक्त बयान पर वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय, इतिहासकार उमा चक्रवर्ती, शबनम हाशमी, पीयूसीएल की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव, तीस्ता सीतलवाड़, मल्लिका साराभाई, एनी राजा, उर्वशी बुटालिया सहित 250 से अधिक महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

महिला संगठनों ने केंद्र और खेल संस्थानों से खेल परिसरों में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए POSH कानून और विशाखा दिशानिर्देशों को पूरी तरह लागू करने, शिकायत करने वाले खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा खेल संघों को राजनीतिक हस्तक्षेप, धमकी और सत्ता के दुरुपयोग से मुक्त बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि महिला खिलाड़ियों के सम्मान और न्याय की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

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