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उत्तराखंड सरकार ने 456 मदरसों का सरकारी अनुदान बंद किया, नई अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था लागू

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के 456 मदरसों को मिलने वाला सरकारी अनुदान बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था लागू किए जाने के बाद लिया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

सरकार के अनुसार, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद मदरसा बोर्ड की भूमिका समाप्त हो गई है।

अब राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता, विनियमन और निगरानी का कार्य यही नया प्राधिकरण करेगा। इसी कारण मदरसा बोर्ड के माध्यम से दी जाने वाली अनुदान व्यवस्था को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव बंशीधर तिवारी ने कहा कि मदरसा बोर्ड अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उससे जुड़ी अनुदान प्रणाली और बजट प्रावधान भी अप्रासंगिक हो गए थे। मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2027-28 से मदरसों के लिए राज्य सरकार के अनुदान बजट को समाप्त करने की मंजूरी दे दी है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. प्रग मधुकर ढाकाटे ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला प्रत्यक्ष अनुदान बंद किया गया है, लेकिन उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्ध और मान्यता प्राप्त मदरसे केंद्र सरकार की यू-डीआईएसई (UDISE) योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं और लाभों के पात्र बने रहेंगे।

हालांकि, सरकार के इस फैसले को लेकर कुछ सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारी अनुदान बंद होने से सैकड़ों मदरसों के संचालन पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और उन्हें केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

फिलहाल, मदरसों के संचालन और छात्रों पर इस निर्णय का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में नई व्यवस्था के लागू होने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।

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