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छह दिन तक चली शव यात्रा के बाद अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को शुक्रवार को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रज़ा के पवित्र मज़ार परिसर में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके अंतिम संस्कार से पहले छह दिनों तक देशभर में शोक सभाएं और जनाज़े के जुलूस आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

रिपोर्टों के अनुसार, अली खामेनेई की 28 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित उनके परिसर पर हुए अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हवाई हमले में मृत्यु हुई थी। इसके बाद अंतिम संस्कार को पहले मार्च में आयोजित किया जाना था, लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। छह दिन तक चले शोक कार्यक्रमों के बाद उन्हें मशहद में दफनाया गया।

तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर से शुरू हुए अंतिम संस्कार में ईरान के वरिष्ठ नेताओं के अलावा हमास, फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद, हिजबुल्लाह और हौथी आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए। बाद में जनाज़ा जुलूस क़ोम, इराक के नजफ़ और कर्बला होते हुए दोबारा ईरान पहुंचा और अंततः मशहद में दफनाया गया।

मशहद में आयोजित अंतिम यात्रा के दौरान भारी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़े। भीड़ इतनी अधिक थी कि जनाज़ा ले जा रहा वाहन दरगाह तक नहीं पहुंच सका, जिसके बाद अधिकारियों ने ताबूत को हेलीकॉप्टर के माध्यम से इमाम रज़ा दरगाह पहुंचाया। जुलूस के दौरान खामेनेई के परिवार के उन चार सदस्यों के ताबूत भी साथ थे, जिनकी उसी हमले में मृत्यु हुई थी।

अंतिम संस्कार समारोह के दौरान खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी के हमले के बाद से वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आए हैं। इसे अंतिम संस्कार की प्रमुख चर्चाओं में से एक माना गया।

इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाइयों की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में युद्धविराम को समाप्त मानते हुए ईरान के नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की, जबकि ईरान ने अमेरिका से जुड़े कई क्षेत्रीय ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है।

अली खामेनेई ने वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में कार्य किया। वह 1979 की इस्लामी क्रांति के नेता रुहोल्लाह खुमैनी के उत्तराधिकारी थे। अपने लगभग चार दशक लंबे कार्यकाल में उन्होंने ईरान की विदेश नीति, रक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय रणनीति पर गहरा प्रभाव डाला तथा देश के सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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