Journo Mirror
India

60 से अधिक संगठनों ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले पर NSA लगाने की निंदा की, तत्काल रिहाई की मांग

गुवाहाटी: देशभर के 60 से अधिक जन आंदोलनों, ट्रेड यूनियनों, लोकतांत्रिक अधिकार संगठनों और पर्यावरण समूहों ने असम सरकार द्वारा आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता और ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (GKLHRPC) के संयोजक प्रणब डोले पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाए जाने की कड़ी निंदा की है।

संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई और हिरासत आदेश वापस लेने की मांग की गई है। संयुक्त बयान के अनुसार, प्रणब डोले को 12 जुलाई को उस मामले में गिरफ्तार किया गया था जो 28 जून को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित हयात लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद दर्ज किया गया था।

इस मामले में चार अन्य कार्यकर्ताओं—अमित नाग, बृजित कुटुम, भास्कर सैकिया और राजीब पेगू—को भी गिरफ्तार किया गया था। 29 जुलाई को गोलाघाट सत्र न्यायालय ने सभी को जमानत दे दी, लेकिन अगले ही दिन असम सरकार ने डोले पर NSA लगाकर उनकी रिहाई रोक दी।

संगठनों का आरोप है कि डोले के परिवार को NSA का आदेश 31 जुलाई को उस समय सौंपा गया, जब जमानत की औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं। बयान में कहा गया है कि यह अदालत के आदेश को निष्प्रभावी बनाने और कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करने का प्रयास है। संगठनों ने कहा कि भूमि, जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज उठाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना जा सकता और विरोध को अपराध की तरह पेश करना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।

संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में असम सरकार से प्रणब डोले के खिलाफ NSA वापस लेने, सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को बिना शर्त वापस लेने तथा आदिवासी और स्वदेशी समुदायों के भूमि एवं आजीविका संबंधी अधिकारों का सम्मान करने की मांग की गई है। संगठनों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर अपना लोकतांत्रिक और कानूनी संघर्ष जारी रखेंगे।

Related posts

Leave a Comment