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APCR को मिली बड़ी कामयाबी: गुजरात हाईकोर्ट ने मुंद्रा में चार धार्मिक स्थलों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर लगाई अंतरिम रोक

गुजरात हाई कोर्ट ने कच्छ जिले के मुंद्रा तालुका में स्थित चार मुस्लिम धार्मिक स्थलों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने आदेश दिया है कि अपील की वैधानिक अवधि समाप्त होने या सक्षम अपीलीय प्राधिकरण द्वारा मामले पर निर्णय लिए जाने तक इन धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई, जिसमें ध्वस्तीकरण भी शामिल है, नहीं की जाएगी।

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) गुजरात के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कच्छ के कई मुस्लिम धार्मिक स्थलों, जिनमें मस्जिदें, दरगाहें और अन्य इबादतगाहें शामिल हैं, को ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस जारी किए गए थे।

इसके बाद APCR गुजरात ने प्रभावित धार्मिक स्थलों की प्रबंधन समितियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई और मुस्लिम युवा कोर कमेटी, कच्छ के सहयोग से गुजरात हाई कोर्ट में उनका पक्ष रखा।

मामला तब शुरू हुआ जब मुंद्रा तालुका के मामलतदार ने गुजरात भूमि राजस्व अधिनियम, 1879 की धारा 61 के तहत आदेश जारी कर चार धार्मिक स्थलों को केवल पांच दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि इस अधिनियम के तहत ऐसे आदेशों के खिलाफ अपील करने के लिए 90 दिनों का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

ऐसे में केवल पांच दिन का समय देकर ध्वस्तीकरण का आदेश देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और अपील के अधिकार का उल्लंघन है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी. मये ने अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ताओं को अपील करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित धार्मिक स्थलों के विरुद्ध कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जा सकती।

APCR ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला कानून के शासन, संवैधानिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करता है। संगठन ने कहा कि वह भविष्य में भी मनमानी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर रहे लोगों और समुदायों को कानूनी सहायता प्रदान करता रहेगा।

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