मथुरा: शाही ईदगाह के बदले मेवात में 20 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव, हिंदू संगठन ने रखा अदालत के बाहर समझौते का फॉर्मूला
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के बीच एक हिंदू संगठन ने अदालत के बाहर समझौते का प्रस्ताव रखा है। श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने शाही ईदगाह कमेटी को पत्र लिखकर मस्जिद के स्थानांतरण के बदले मेवात में 20 एकड़ जमीन देने की पेशकश की है। प्रस्ताव के मुताबिक, संगठन वहां मस्जिद के निर्माण का खर्च भी उठाने को तैयार है।
20 अगस्त को लिखे गए पत्र में फलाहारी महाराज ने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष अदालत के बाहर विवाद सुलझाने के लिए तैयार होता है, तो उनका संगठन मेवात में 20 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के साथ मस्जिद निर्माण के लिए जरूरी खर्च वहन करने को तैयार है। उन्होंने तर्क दिया कि मेवात में मुस्लिम आबादी अधिक है और वहां मुस्लिम समुदाय नमाज अदा कर सकता है।
यह प्रस्ताव मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और उससे सटी शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्तमान स्थल भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है और वहां पूजा में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष मस्जिद की स्थिति में बदलाव की मांगों का लगातार विरोध करता रहा है।
फलाहारी महाराज ने अपने प्रस्ताव को सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारा कायम रखने की पहल के तौर पर पेश किया है। उन्होंने मथुरा को “प्रेम का शहर” बताते हुए मुस्लिम पक्ष से प्रस्ताव स्वीकार करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि कृष्ण भक्तों की आस्था ब्रज क्षेत्र से जुड़ी है और वे उस स्थान पर बिना किसी बाधा के पूजा करना चाहते हैं, जिसे वे कृष्ण का जन्मस्थान मानते हैं।
1968 के समझौते का भी हवाला
प्रस्ताव में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह कमेटी के बीच 1968 में हुए समझौते का भी उल्लेख किया गया है। मथुरा विवाद से जुड़े विभिन्न कानूनी मामलों में दोनों पक्ष इस समझौते का अलग-अलग संदर्भों में हवाला देते रहे हैं। फलाहारी महाराज ने कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष अदालत के बाहर समाधान के लिए तैयार है तो हिंदू पक्ष बातचीत के लिए तैयार है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संभावित मध्यस्थ के तौर पर शामिल करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना है कि अखिलेश यादव की मध्यस्थता बातचीत की प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगी। हालांकि, प्रस्ताव को लेकर मुस्लिम पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
मथुरा विवाद को लेकर विभिन्न अदालतों में कानूनी कार्यवाही जारी है। इसी बीच दोनों पक्षों के बीच बातचीत और मध्यस्थता के जरिए समाधान की संभावनाओं पर भी चर्चा होती रही है। ऐसे में शाही ईदगाह के बदले मेवात में 20 एकड़ जमीन और मस्जिद निर्माण का खर्च उठाने की यह पेशकश विवाद के समाधान को लेकर एक नए प्रस्ताव के रूप में सामने आई है।

