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बाढ़ में इंसानियत की मिसाल: मुस्लिम शख्स ने मंदिर, नामघर और मस्जिदों की सफाई में की मदद

असम, 23 अगस्त 2026: असम में हाल ही में आई बाढ़ ने शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के पानी से घरों और सामानों के साथ-साथ कई धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए। पानी कम होने के बाद स्थानीय लोग अपने इलाकों की सफाई में जुटे हैं।

इसी बीच असम के गोरिया-मोरिया-देसी संगठन से जुड़े मून अली गोरिया ने सांप्रदायिक सौहार्द और इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित मंदिरों, नामघरों और मस्जिदों की सफाई और पुनः व्यवस्था में मदद के लिए आगे कदम बढ़ाया।

मून अली गोरिया ने बाढ़ प्रभावित मंदिरों और नामघरों का दौरा किया। उन्होंने धार्मिक परिसरों में जमा कीचड़, गंदगी और मलबा हटाने में लोगों की मदद की। बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई धार्मिक सामग्री के स्थान पर उन्होंने भगवद गीता और अन्य हिंदू धार्मिक ग्रंथों की प्रतियां भी उपलब्ध कराईं।

इसके बाद उन्होंने प्रभावित मस्जिदों का भी दौरा किया। यहां उन्होंने बाढ़ से क्षतिग्रस्त धार्मिक सामग्री के स्थान पर कुरान की प्रतियां और नमाज की चटाइयां उपलब्ध कराईं।

मून अली गोरिया ने कहा कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग आपस में भाई हैं और मुश्किल समय में एक-दूसरे की मदद करना ही इंसानियत की पहचान है। उनका कहना है कि जिस तरह बाढ़ से प्रभावित मस्जिदों की मदद की गई, उसी तरह हिंदू धार्मिक स्थलों की मदद करना भी जरूरी है।

उनके इस प्रयास को ऐसे समय में सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जब असम के कई इलाके बाढ़ की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। मंदिरों, नामघरों और मस्जिदों की बिना किसी भेदभाव के मदद कर गोरिया ने यह संदेश देने की कोशिश की कि आपदा के समय इंसानियत और मदद की भावना धार्मिक पहचान से ऊपर होनी चाहिए।

यह पहल न केवल बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत देने की कोशिश है, बल्कि मुश्किल वक्त में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का भी सकारात्मक संदेश देती है।

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