जम्मू के रायका वन क्षेत्र में अधिकारियों ने शनिवार को करीब एक दर्जन झोपड़ियों को ध्वस्त कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, ये ढांचे वन भूमि पर कथित अतिक्रमण कर बनाए गए थे और इनमें ज्यादातर रोहिंग्या परिवार रह रहे थे। यह जम्मू में एक महीने के भीतर रोहिंग्या बस्तियों से जुड़ा दूसरा बड़ा बेदखली अभियान बताया जा रहा है।
यह कार्रवाई जम्मू के बाहरी इलाके में स्थित रहीम नगर में हुई। वन विभाग ने वन सुरक्षा बल, राजस्व विभाग और पुलिस की मदद से अभियान चलाया। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित ढांचों को वन भूमि पर अतिक्रमण के तौर पर चिन्हित किया गया था। विभाग के अनुसार करीब पांच हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण का रिकॉर्ड तैयार किया गया है और अन्य चिन्हित अतिक्रमणों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले से पर्याप्त सूचना नहीं दी गई। जम्मू निवासी स्टीफन ने कहा कि वह पिछले 10-12 वर्षों से यहां रह रहे थे और अब उनके पास बच्चों के साथ जाने के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विध्वंस दल सुबह-सुबह पहुंचा और लोगों को अपना सामान हटाने के लिए बहुत कम समय दिया।
वहीं एक वन अधिकारी ने इन आरोपों से अलग दावा करते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले दो सप्ताह के भीतर निवासियों को दो बार चेतावनी दी गई थी। अधिकारी के मुताबिक, ढांचे गिराने से पहले लोगों को अपना सामान हटाने का अवसर दिया गया और महिला पुलिसकर्मियों की मदद से महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। अधिकारी ने कहा कि कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है और केवल उन्हीं ढांचों को गिराया गया जिन्हें अवैध घोषित किया गया था।
रोहिंग्या परिवारों का कहना है कि वे म्यांमार में उत्पीड़न और कठिन परिस्थितियों से बचकर भारत आए थे और करीब दो दशकों से जम्मू के अलग-अलग इलाकों में रह रहे हैं। एक निवासी अब्दुल खालिक ने कहा कि उनके पास संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी पहचान पत्र हैं और वे स्थायी रूप से यहां बसने के इरादे से नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता है।
वन विभाग के अधिकारी ने कहा कि कार्रवाई किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की गई है, बल्कि इसका उद्देश्य वन भूमि से अतिक्रमण हटाना है। अधिकारी ने कहा कि वन नियम सभी के लिए समान हैं और जिन लोगों को आवास की जरूरत है, उन्हें कानूनी माध्यम से जमीन या मकान हासिल करने की सलाह दी गई है।
यह कार्रवाई जम्मू के करयानी तालाब इलाके में रोहिंग्या बस्ती को खाली कराए जाने के करीब एक महीने बाद हुई है। इसके अलावा जम्मू के कई इलाकों में अस्थायी आश्रयों, झोपड़ियों और दुकानों को भी हटाया गया है। प्रशासन का कहना है कि इन मामलों में कार्रवाई अनधिकृत उपयोग और अतिक्रमण के खिलाफ है, न कि किसी विशेष समुदाय के खिलाफ।
रोहिंग्या बस्तियों को लेकर प्रशासन का ध्यान उस समय और बढ़ा जब जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर गठित केंद्रीय उच्च स्तरीय समिति ने अगस्त में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 7,656 रोहिंग्याओं की पहचान की गई है। इनमें 6,737 जम्मू क्षेत्र के 10 जिलों और 919 कश्मीर घाटी के 10 जिलों में बताए गए हैं। सरकारी आंकड़ों में केंद्र शासित प्रदेश में 504 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान किए जाने की भी बात कही गई है।

