गांधीनगर: गुजरात सरकार ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) की आपत्ति के बाद कवि अज़ीज़ टंकारवी की एक कविता को अपने वार्षिक दिवाली प्रकाशन के ऑनलाइन संस्करण से हटा दिया है। VHP ने आरोप लगाया था कि कविता में भगवान राम और मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक बातें कही गई हैं, जिससे हिंदू भावनाएं आहत हुई हैं।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की 26 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कविता गुजरात सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग की ओर से प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘गुजरात दीपोत्सव अंक’ में शामिल थी। ऑनलाइन संस्करण से कविता हटाए जाने के बाद उसकी जगह कवि प्रकाश ‘जलाल’ की रचना ‘जोइए’ को शामिल किया गया है।
गुजरात VHP के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूत ने कविता हटाए जाने की पुष्टि करते हुए राज्य सरकार के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि संगठन की मांग पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और विवादित कविता को दिवाली पत्रिका से हटा दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, 23 अक्टूबर को VHP ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर कविता को हटाने और इसे प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार कवि तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। VHP के अहमदाबाद क्षेत्र के सचिव अश्विन पटेल ने पत्र में पत्रिका के पृष्ठ 389 पर प्रकाशित कविता पर आपत्ति जताई थी।
संगठन का तर्क था कि दिवाली भगवान राम के 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटने से जुड़ा त्योहार है। ऐसे में सरकारी दिवाली प्रकाशन में ऐसी कविता को शामिल करना अनुचित है, जिसमें उसके आरोपों के मुताबिक भगवान राम और मीराबाई के बारे में आपत्तिजनक बातें कही गई हैं।
VHP ने यह भी मांग की कि सरकारी प्रकाशनों में लेखकों की रचनाएं शामिल करने से पहले उनके पिछले लेखन की समीक्षा की जाए। संगठन ने भविष्य के सरकारी प्रकाशनों में ऐसे लेखकों को जगह देने की मांग की, जिनका देश, धर्म और संस्कृति के प्रति दृष्टिकोण उसके अनुसार सकारात्मक हो।
इस मामले में गुजरात सरकार के सूचना एवं प्रसारण विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के सचिव विक्रांत पांडे से टिप्पणी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

