पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के संस्थापक अध्यक्ष रहे ई. अबूबकर की गिरफ्तारी और लंबी कैद को 1500 दिन पूरे हो गए हैं। इस मौके पर उनकी बेटी लीना थब्बस्सुम ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “1500 दिन से इंसाफ जंजीरों में कैद है।” उन्होंने अपने पिता की लंबी हिरासत और लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है।
मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ई. अबूबकर की बेटी ने सोमवार को यह पोस्ट ऐसे समय में साझा की है, जब परिवार उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। परिवार का कहना है कि अबूबकर सीने में संक्रमण, गंभीर खांसी, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव तथा ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
परिवार की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने करीब दो सप्ताह पहले उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले शामिल थे, ने उन्हें साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत दी। हालांकि, अदालत ने इसके साथ कई शर्तें भी लगाईं। इनमें इलाज और पुलिस सुरक्षा का खर्च खुद वहन करना तथा अस्पताल में उनके साथ केवल परिवार के एक सदस्य को रहने की अनुमति देना शामिल है। अदालत ने अस्पताल से इलाज की आगे की प्रक्रिया और संभावित अवधि को लेकर रिपोर्ट भी मांगी थी।
इससे पहले ई. अबूबकर को जेल प्रशासन की ओर से दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी जमानत याचिका दिल्ली की एक अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। परिवार के मुताबिक, अबूबकर को 2020 में कैंसर की सर्जरी करानी पड़ी थी। वह पार्किंसन, मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारी सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी पीड़ित हैं।
ई. अबूबकर को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े यूएपीए मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में जून 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने पीएफआई के 25 सदस्यों और संगठन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने अपने आदेश में 2047 तक भारतीय सरकार को गिराकर इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की कथित साजिश के संबंध में गंभीर संदेह का उल्लेख किया था।
हालांकि, मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने पीएफआई पर प्रतिबंध और उसके नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इन कार्रवाइयों के पीछे राजनीतिक प्रतिशोध और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की नीति काम कर रही है।
ई. अबूबकर की बेटी लीना थब्बस्सुम ने पिछले साल खुद कैंसर से जूझते हुए अस्पताल के बिस्तर से अपने पिता को एक भावुक पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पिता से मिलने की तड़प और इलाज के दौरान झेली जा रही तकलीफों का जिक्र किया था।
पत्र में उन्होंने अपने हाथों से सिले एक बैग का जिक्र करते हुए लिखा था कि यह बैग उन्होंने अपने अंतहीन दर्द से निकली सुई और लगातार बहते आंसुओं के धागे से बनाया है। उन्होंने अपने पिता से उस बैग को चूमने की गुजारिश की थी।
इसके जवाब में तिहाड़ जेल से ई. अबूबकर ने अपनी बेटी को हिम्मत रखने का संदेश दिया था। उन्होंने लिखा था कि इंशाअल्लाह, वे इस दुनिया में या फिर आखिरत में जरूर मिलेंगे और इसके लिए दुआ करने को कहा था।

