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बॉन्डी हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया में बढ़ी मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत, मस्जिदों की सुरक्षा कड़ी की

ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी इलाके में हुए आतंकी हमले के बाद देश में इस्लाम विरोधी नफरत और धमकियों में तेज़ी देखी जा रही है। मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हमले के बाद से मुसलमानों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

इस्लामफोबिया रजिस्टर ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, 14 दिसंबर की घटना के बाद एक सप्ताह में नफरत से जुड़ी 126 शिकायतें दर्ज की गईं, जो इससे पहले के हफ्तों की तुलना में दस गुना अधिक हैं। इनमें मस्जिदों को धमकियां, मुस्लिम महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और सार्वजनिक स्थानों पर नस्लवादी टिप्पणियां शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय इमाम परिषद के उपाध्यक्ष अहमद अब्दो ने बताया कि कई मुस्लिम महिलाओं को गालियां दी गईं और कुछ के साथ बंदूक चलाने जैसे इशारे किए गए।

उन्होंने कहा, “डर का माहौल बहुत बढ़ गया है। कुछ महिलाएं हिजाब पहनकर घर से बाहर निकलने से भी डर रही हैं।”
हमले के बाद सिडनी और अन्य इलाकों में मस्जिदों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

लेकम्बा मस्जिद सहित कई धार्मिक स्थलों पर पुलिस गश्त बढ़ाई गई है। वहीं, एक मुस्लिम कब्रिस्तान में सूअरों के कटे सिर फेंके जाने और क्वींसलैंड व विक्टोरिया में मस्जिदों व इस्लामी स्कूलों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।

इस बीच, मुस्लिम नेताओं ने हमले की कड़ी निंदा की है और मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुदाय हिंसा या नफरत का जवाब नफरत से नहीं देगा।

विक्टोरिया इस्लामिक काउंसिल के अध्यक्ष मोहम्मद मोहिदीन ने कहा, “हम खुद को पीड़ित नहीं मानेंगे, लेकिन डर के माहौल को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।”

न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने मुस्लिम और यहूदी समुदाय के नेताओं के साथ एकजुटता दिखाई और कहा कि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सिडनी की अल-हिदायह मस्जिद में यहूदी समुदाय के साथ मिलकर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसे सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताया गया।

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