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हेमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंची CPI(M) और CPI ने

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की वरिष्ठ नेता एनी राजा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर असम में बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, एडवोकेट निज़ाम पाशा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आपत्तिजनक भाषणों और हाल ही में सामने आए एक वीडियो को लेकर कई शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

याचिका में उस वीडियो का भी हवाला दिया गया है, जो असम भाजपा के आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को मुसलमानों पर प्रतीकात्मक रूप से बेहद करीब से गोली चलाते हुए दिखाया गया था।

वीडियो के कैप्शन में “बिल्कुल करीब से गोली मारो” जैसे शब्द लिखे गए थे। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद इस वीडियो को हटा लिया गया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, सुप्रीम कोर्ट में भी राजनीतिक लड़ाइयां लड़ी जाती हैं।

उन्होंने कहा, “समस्या यह है कि जब भी चुनाव आते हैं, चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट के अंदर लड़ा जाता है। हम इसका समाधान निकालेंगे और तारीख बताएंगे।”

सीपीआईएम और एनी राजा ने अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर कर मुख्यमंत्री के खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषण और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री की बयानबाजी जानबूझकर अवैध आप्रवासन को मुस्लिम पहचान से जोड़ती है, जबकि आप्रवासन एक धर्म-निरपेक्ष मुद्दा है।

याचिकाकर्ताओं ने एनआरसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि इससे बाहर किए गए लोगों में बड़ी संख्या गैर-मुस्लिमों की भी थी।

हाल के हफ्तों में हिमंता बिस्वा सरमा को उनके कई बयानों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिन्हें विपक्ष ने “घृणित और विभाजनकारी” बताया है।

डिगबोई में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कथित तौर पर मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान “मिया समुदाय को परेशान करने” की बात कही थी। असम में बंगाली मूल के मुसलमानों को अक्सर अपमानजनक रूप से “मिया” कहा जाता है।

राज्य में मुसलमान, विशेष रूप से बंगाली मूल के लोग, सामाजिक-आर्थिक रूप से सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों में शामिल हैं और उन्हें अक्सर राजनीतिक विमर्श में “बाहरी” या “अवैध अप्रवासी” के रूप में चित्रित किया जाता रहा है।

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