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उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026: दिल्ली पुलिस ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं का दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है। पुलिस ने दोनों को मामले का कथित “मुख्य साजिशकर्ता” बताते हुए उनकी याचिकाओं को गलत और कानूनी रूप से अस्वीकार्य बताया है।

दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग दाखिल किए गए हलफनामों में सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले का हवाला दिया है। पुलिस के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम के मामले में यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लागू प्रतिबंध को बरकरार रखा था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस कानूनी मुद्दे पर दोबारा सुनवाई की गुंजाइश नहीं है।

पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नई जमानत याचिका दायर करने के लिए एक शर्त तय की थी। इसके तहत संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश की तारीख से एक साल बीतने के बाद, जो भी पहले हो, नई जमानत याचिका दायर की जा सकती है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल यह शर्त पूरी नहीं हुई है।

खालिद और इमाम इससे पहले भी जमानत के लिए निचली अदालत, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं, जहां उन्हें राहत नहीं मिली। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले के पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों ने निचली अदालत में नई जमानत याचिकाएं दाखिल कीं, जिन्हें 4 जुलाई को खारिज कर दिया गया। अब दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।

नई याचिकाओं में दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम एनआईए मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि हालिया न्यायिक घटनाक्रम उनके मामलों में परिस्थितियों में बदलाव को दर्शाता है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि अंद्राबी मामले का फैसला दिल्ली दंगों के मामले या खालिद और इमाम की कथित भूमिका से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है।

आरोपियों की ओर से सह-आरोपी तस्लीम अहमद के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है। पुलिस ने कहा कि अलग-अलग फैसलों के बीच कथित कानूनी मतभेदों के बावजूद जनवरी 2026 में खालिद और इमाम के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बाध्यकारी है और यूएपीए के तहत जमानत की पाबंदियां उनकी नई याचिकाओं पर भी लागू होती हैं। अब दिल्ली हाईकोर्ट दोनों की नई जमानत याचिकाओं और दिल्ली पुलिस की आपत्तियों पर विचार करेगा।

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