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मोहम्मद अशरफ लिंचिंग केस: कर्नाटक हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने से किया इनकार, पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजा योजना का आदेश

बेंगलुरु, 27 अगस्त 2026: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलुरु में केरल के मुस्लिम युवक मोहम्मद अशरफ की कथित मॉब लिंचिंग के आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को मॉब हिंसा के पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए अंतरिम मुआवजे की व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को यह योजना तीन महीने के भीतर बनाने को कहा गया है।

जस्टिस विजयकुमार ए. पाटिल की अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तहसीन एस. पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में दिए गए दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने विशेष रूप से मॉब लिंचिंग के मामलों में पीड़ित या उनके निकटतम परिजनों को जमानत दिए जाने से पहले नोटिस देने और अंतरिम मुआवजा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अशरफ के परिवार को जमानत दिए जाने से पहले समय पर नोटिस नहीं देना सत्र अदालत की “गंभीर गलती” थी। हालांकि, अदालत ने माना कि केवल इस प्रक्रिया संबंधी चूक के आधार पर आरोपियों की जमानत रद्द नहीं की जा सकती। जमानत रद्द करने के लिए आम तौर पर यह दिखाना जरूरी होता है कि जमानत आदेश अवैध, मनमाना या अनुचित था या बाद में ऐसी परिस्थितियां सामने आईं जिनसे जमानत रद्द करने का आधार बनता है।

अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट की रजिस्ट्री और प्रधान जिला न्यायाधीशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मॉब हिंसा या लिंचिंग से जुड़े मामलों में पीड़ितों या उनके निकटतम परिजनों को मामले में पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने माना कि वर्तमान सरकारी आदेश में मुआवजे का प्रावधान तो है, लेकिन तहसीन एस. पूनावाला के दिशानिर्देशों के अनुरूप अंतरिम मुआवजे की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

मोहम्मद अशरफ मूल रूप से केरल के कोट्टक्कल के रहने वाले थे और अपने परिवार के साथ वायनाड के पुलपल्ली में रहते थे। 27 अप्रैल को मंगलुरु के कुदुपु इलाके में बत्रा कल्लूरथी मंदिर के पास एक स्थानीय क्रिकेट मैच देखते समय उन पर कथित तौर पर हमला किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद उस समय शुरू हुआ जब अशरफ ने पास में क्रिकेट खेल रहे लोगों द्वारा रखा गया पानी पी लिया। इसके बाद कथित तौर पर सचिन टी. नामक व्यक्ति ने उनसे बहस की। आरोप है कि इसके बाद बीजेपी पार्षद संगीता नायक के पति रवींद्र नायक के नेतृत्व में एक समूह ने क्रिकेट बैट और अन्य हथियारों से अशरफ पर हमला किया। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप की कोशिश के बावजूद हमला जारी रहा।

अशरफ को गंभीर चोटें आने के बाद हमलावर कथित तौर पर मौके से फरार हो गए। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और उनकी मौत अंदरूनी रक्तस्राव तथा सदमे के कारण हुई।

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के दावे पर भी उठे सवाल

अशरफ की मौत के बाद आरोपियों की ओर से यह दावा सामने आया था कि उन्होंने क्रिकेट मैच के दौरान “पाकिस्तान जिंदाबाद” का नारा लगाया था। हालांकि, स्थानीय लोगों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इस दावे को खारिज किया गया और इसे कथित तौर पर हमले को सही ठहराने की कोशिश बताया गया।

मामले में कई आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मई में कथित मुख्य आरोपी 26 वर्षीय सचिन को भी जमानत दी थी। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश में आरोपियों की जमानत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को मॉब हिंसा के पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजे की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

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