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हिन्दू लॉबी कभी अपनी कम्युनिटी से सवाल नहीं करती है कि आप मुसलमानों से इतनी नफ़रत क्यों करते हो?

मुसलमानों के साथ जब भी हेट-क्राइम होता है। एक हिन्दू लॉबी आपको ये कहते हुए मिल जाएगी कि मुसलमान लिंचिंग पे ख़ामोश रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमान अपनी मर्ज़ी से खाना न खाए, अपनी मर्ज़ी से लिबास न पहने, मुसलमान अपनी मर्ज़ी से दाढ़ी न रखे अपनी आइडेंटिटी के साथ मुआशरे में ज़िन्दगी न गुज़ारे वरना बीजेपी आ जायेगी।

मुसलमान बेटियां हिजाब न पहनें जब मुसलमान बेटियों की शिनाख़्त पे हमले हो तो मुसलमान चुप रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमान नमाज़ न पढ़े, मुसलमान अज़ान न दे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमानों के इल्मी इदारों, मसाजिदों पे हमले हो तो मुसलमान ख़ामोश रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। ऐसी न जाने और कितनी बातें हैं जो मुसलमानों के करने से बीजेपी को फ़ायदा पहुंचता है।

लेकिन ये हिन्दू लॉबी कभी अपनी कम्युनिटी से सवाल नहीं करती है कि आप मुसलमानों से इतनी नफ़रत क्यों करते हो? मुसलमानों की लिंचिंग पे जब दूसरा मुसलमान बोलता है तो आप रेडिक्लाइज़ क्यों हो जाते हो? मुसलमान बच्चियों के हिजाब पहनने से आप रेडिक्लाइज़ कैसे हो जाते हो?

कर्नाटक के मुस्लिम बच्चियों की लड़ाई कॉलेज प्रशासन और वहां की हुकूमत से है। वो बच्चियां अपने हक़ अपने आईनी हक़ के लिये लड़ रही हैं। तो इसमें आप (हिन्दू) कहाँ से आ गए? उन बच्चियों की इस लड़ाई से यूपी का हिन्दू रेडिक्लाइज़ कैसे हो जाएगा?

मुसलमान बच्चियों की कॉलेज प्रशासन से यह लड़ाई पांच सूबों पे असर कैसे डाल देगा? यअनी मुसलमानों का क़त्ल हो, लिंचिंग हो, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती हो, रेप हो तो मुसलमान चुप रहे वरना हिन्दू रेडिक्लाइज़ हो जाएगा? क्या अक्सरियत को सही ग़लत समझने की तमीज़ नहीं है? क्या उन्हें हक़ ना-हक़ में फ़र्क़ समझ में नहीं आता?

मुसलमानों को ज्ञान देने वाली उस हिन्दू लॉबी से सिर्फ़ इतना ही कहना चाहता हूँ। अब बीजेपी को फ़ायदा पहुंचे, बीजेपी आये या हिन्दू रेडिक्लाइज़ हो। ख़ामोश रहने वाले उस वक़्त का ख़ात्मा हो चुका है।

मुसलमानों को ख़ामोश कराने के बजाए आप अपनी कम्युनिटी का सड़कर बजबजा चुके ज़ख्म का ईलाज कराइये। वरना ये ज़ख्म पूरे जिस्म में फैल जाएगा। अपनी कम्युनिटी के इंतिहा-पसंदों के ख़िलाफ़ खड़े होइये। वरना ये इंतिहा-पसंद इस मुल्क, आपकी संस्कृति, आपके धर्म को और ज़्यादह नुक़सान पहुंचाएंगे। आंखें खोलिये देखिये दुनिया आप पे थूक रही है।

मुसलमानों के साथ जब भी हेट-क्राइम होता है। एक हिन्दू लॉबी आपको ये कहते हुए मिल जाएगी कि मुसलमान लिंचिंग पे ख़ामोश रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमान अपनी मर्ज़ी से खाना न खाए, अपनी मर्ज़ी से लिबास न पहने, मुसलमान अपनी मर्ज़ी से दाढ़ी न रखे अपनी आइडेंटिटी के साथ मुआशरे में ज़िन्दगी न गुज़ारे वरना बीजेपी आ जायेगी।

मुसलमान बेटियां हिजाब न पहनें जब मुसलमान बेटियों की शिनाख़्त पे हमले हो तो मुसलमान चुप रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमान नमाज़ न पढ़े, मुसलमान अज़ान न दे वरना बीजेपी आ जायेगी। मुसलमानों के इल्मी इदारों, मसाजिदों पे हमले हो तो मुसलमान ख़ामोश रहे वरना बीजेपी आ जायेगी। ऐसी न जाने और कितनी बातें हैं जो मुसलमानों के करने से बीजेपी को फ़ायदा पहुंचता है।

लेकिन ये हिन्दू लॉबी कभी अपनी कम्युनिटी से सवाल नहीं करती है कि आप मुसलमानों से इतनी नफ़रत क्यों करते हो? मुसलमानों की लिंचिंग पे जब दूसरा मुसलमान बोलता है तो आप रेडिक्लाइज़ क्यों हो जाते हो? मुसलमान बच्चियों के हिजाब पहनने से आप रेडिक्लाइज़ कैसे हो जाते हो?

कर्नाटक के मुस्लिम बच्चियों की लड़ाई कॉलेज प्रशासन और वहां की हुकूमत से है। वो बच्चियां अपने हक़ अपने आईनी हक़ के लिये लड़ रही हैं। तो इसमें आप (हिन्दू) कहाँ से आ गए? उन बच्चियों की इस लड़ाई से यूपी का हिन्दू रेडिक्लाइज़ कैसे हो जाएगा?

मुसलमान बच्चियों की कॉलेज प्रशासन से यह लड़ाई पांच सूबों पे असर कैसे डाल देगा? यअनी मुसलमानों का क़त्ल हो, लिंचिंग हो, ज़ुल्म-ओ-ज़्यादती हो, रेप हो तो मुसलमान चुप रहे वरना हिन्दू रेडिक्लाइज़ हो जाएगा? क्या अक्सरियत को सही ग़लत समझने की तमीज़ नहीं है? क्या उन्हें हक़ ना-हक़ में फ़र्क़ समझ में नहीं आता?

मुसलमानों को ज्ञान देने वाली उस हिन्दू लॉबी से सिर्फ़ इतना ही कहना चाहता हूँ। अब बीजेपी को फ़ायदा पहुंचे, बीजेपी आये या हिन्दू रेडिक्लाइज़ हो। ख़ामोश रहने वाले उस वक़्त का ख़ात्मा हो चुका है।

मुसलमानों को ख़ामोश कराने के बजाए आप अपनी कम्युनिटी का सड़कर बजबजा चुके ज़ख्म का ईलाज कराइये। वरना ये ज़ख्म पूरे जिस्म में फैल जाएगा। अपनी कम्युनिटी के इंतिहा-पसंदों के ख़िलाफ़ खड़े होइये। वरना ये इंतिहा-पसंद इस मुल्क, आपकी संस्कृति, आपके धर्म को और ज़्यादह नुक़सान पहुंचाएंगे। आंखें खोलिये देखिये दुनिया आप पे थूक रही है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं लेखक शाहनवाज अंसारी मुस्लिम एक्टिविस्ट हैं)

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