दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच एनएसयूआई (NSUI) की जामिया इकाई के दो नेताओं जीशान खान और मोहम्मद फैजान को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय में छात्र लगातार प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच छात्र नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई ने आंदोलन को लेकर तनाव और बढ़ा दिया है।
यूथ कांग्रेस की नेता गुरमेहर कौर की ओर से साझा किए गए बयान के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने दोनों छात्र नेताओं को विश्वविद्यालय के गेट के बाहर से हिरासत में लिया था। बयान में कहा गया है कि दोनों को करीब 24 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
बयान में पुलिस के उन आरोपों को खारिज किया गया है, जिनमें दोनों पर सार्वजनिक शांति भंग करने का आरोप लगाया गया। बयान के मुताबिक, छात्र नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई आंदोलन को दबाने और छात्रों को डराने की कोशिश है। हालांकि, पुलिस के आरोपों और कार्रवाई के संबंध में उसका पक्ष सामने आना बाकी है।
जामिया में छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन जारी है। छात्र प्रदर्शन के साथ भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय के गेट बंद किए जाने और वेल्डिंग किए जाने, सभाओं पर पाबंदियों तथा कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने जैसे मुद्दों को लेकर भी विरोध जताया जा रहा है।
छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ को बहाल करने और चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाए। लगातार जारी प्रदर्शन के बीच दो छात्र नेताओं को जेल भेजे जाने की घटना ने एक बार फिर जामिया में छात्र अधिकारों, विरोध-प्रदर्शन की स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

