उत्तराखंड के कोटद्वार में गणतंत्र दिवस के दिन हुई एक सांप्रदायिक घटना के दौरान एक युवक दीपक कुमार, जिन्हें अब लोग प्यार से ‘मुहम्मद’ दीपक कहकर बुला रहे हैं, ने मानवता और भाईचारे की मिसाल पेश की है।
जानकारी के अनुसार, बजरंग दल से जुड़े कुछ तत्व एक बुज़ुर्ग मुस्लिम व्यक्ति मुहम्मद बाबा को कथित रूप से परेशान कर रहे थे। इसी दौरान जिम ट्रेनर दीपक कुमार मौके पर पहुंचे और अकेले ही लगभग 150 लोगों की भीड़ के सामने डटकर बुज़ुर्ग की रक्षा की। दीपक की शारीरिक क्षमता और साहस को देखकर हमलावर पीछे हटने पर मजबूर हो गए।
पीछे हटते समय भीड़ ने दीपक से उनका नाम पूछा, जिस पर उन्होंने बिना झिझक जवाब दिया — “मेरा नाम मुहम्मद दीपक है।” इस जवाब ने न सिर्फ हमलावरों को चौंका दिया, बल्कि पूरे इलाके में भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश भी दिया।
दीपक, जो स्वयं हिंदू हैं, कहते हैं कि उन्हें एक असहाय बुज़ुर्ग मुस्लिम व्यक्ति की मदद करने पर गर्व है। इस घटना के बाद दीपक को कथित रूप से सांप्रदायिक तत्वों की ओर से धमकियां मिल रही हैं, जिसके चलते उनका जिम भी लगभग बंद पड़ा है।
केरल से आए एक सामाजिक कार्यकर्ता और सांसद जॉन ब्रिटास ने कोटद्वार पहुंचकर दीपक, उनके परिवार और मुहम्मद बाबा से मुलाकात की।
उन्होंने दीपक की मां द्वारा बेची जा रही चाय पी, उनके जिम में सदस्यता ली और मुहम्मद बाबा की कपड़ों की दुकान से खरीदारी कर समर्थन जताया। साथ ही, उन्होंने कोटद्वार पुलिस स्टेशन में जाकर इस मामले में दीपक के खिलाफ दर्ज केस पर विरोध भी दर्ज कराया और आरोप लगाया कि पुलिस दंगाइयों को संरक्षण दे रही है।
सांसद जॉन ब्रिटास का कहना है कि यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की बहादुरी का नहीं, बल्कि देश में बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ खड़े होने की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ‘मुहम्मद’ दीपक आज नफरत के दौर में इंसानियत और उम्मीद की चमकती रोशनी बन चुके हैं।

