देश के 180 से अधिक विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों के एक समूह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा बंगाली मुसलमानों के खिलाफ की गई कथित “घृणित और विभाजनकारी” टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है।
एक संयुक्त सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बयानबाजी और नीतियां संविधान, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
बयान में डिगबोई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान “मिया समुदाय को कष्ट पहुँचाने” की बात कही थी। “मिया” शब्द को असम में बंगाली मुसलमानों के लिए अपमानजनक माना जाता है, जिससे समुदाय के खिलाफ नफरत और भेदभाव को बढ़ावा मिलने का आरोप लगाया गया है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची से “4–5 लाख” लोगों के नाम हटाने की बात कहकर बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने का संकेत दिया है।
इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि उनकी टिप्पणियों से बंगाली मुसलमानों के खिलाफ आर्थिक भेदभाव को बढ़ावा मिला है, खासकर अनौपचारिक क्षेत्रों में कम वेतन जैसी प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करके।
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि सरकारी बेदखली अभियानों और प्रशासनिक कार्रवाइयों में मुख्य रूप से बंगाली मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे राज्य में शत्रुतापूर्ण माहौल बना है और मुस्लिम बहुल इलाकों में घरों के विध्वंस व लोगों को कथित तौर पर बाहर भेजने जैसे मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
असम सरकार से अपील करते हुए, बयान में ऐसी सभी कार्रवाइयों को रोकने और संविधान में निहित समानता, धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद के मूल्यों की रक्षा करने की मांग की गई है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि वे चुप नहीं रहेंगे और अल्पसंख्यक समुदायों को हाशिए पर डालने वाली नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखेंगे।

