मेघालय की राजधानी शिलांग के लोअर लुम्पारिंग इलाके में मंगलवार को उस समय तनाव फैल गया, जब खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) के लाबान सर्कल के सदस्यों ने एक इमारत को बंद कर दिया, जिसे स्थानीय रूप से “लुम्पारिंग मस्जिद” के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
छात्र संगठन का आरोप है कि यह ढांचा बिना आवश्यक सरकारी अनुमति के बनाया गया है और जिस जमीन पर यह स्थित है, उसका स्वामित्व भी विवादित है। KSU नेताओं के मुताबिक, यह इमारत मूल रूप से पास के कब्रिस्तान के चौकीदार के रहने के लिए बनाई गई थी, लेकिन बाद में इसे मस्जिद में बदल दिया गया।
कार्रवाई के दौरान KSU सदस्यों ने परिसर में रह रहे इमाम को तत्काल जगह खाली करने के लिए कहा। संगठन का कहना है कि वहां बिना अनुमति धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
बताया जा रहा है कि स्थानीय पारंपरिक निकाय डोरबार श्नोंग ने पहले ही इस मामले की जांच कर कथित अवैध ढांचे को हटाने का फैसला लिया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका। इसी के बाद KSU ने हस्तक्षेप किया।
छात्र संगठन ने अब इस मुद्दे को लेकर उच्च अधिकारियों से संपर्क करने और इमारत को पूरी तरह हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में किसी भी निर्माण को स्थानीय कानूनों और परंपराओं के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि इलाके में दिनभर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा की खबर नहीं है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर बंटी हुई है—कुछ लोग अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह रहे हैं।

