Jamiat Ulama-i-Hind की तीन दिवसीय आठवीं केंद्रीय द्विवार्षिक परामर्श बैठक बुधवार को अंडमान-निकोबार में संपन्न हुई। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने, प्रशिक्षण विभाग के विस्तार और नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर जोर दिया गया।
बैठक में अगले छह महीनों के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 30,000 से अधिक कार्यकर्ताओं और युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही देशभर में 1,450 मस्जिदों को “मॉडल मस्जिद” के रूप में विकसित करने का भी निर्णय लिया गया।
संगठन के अध्यक्ष Maulana Mahmood Asad Madani ने अपने संबोधन में कहा कि जमीयत की असली ताकत उसके प्रशिक्षित, अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर की सामाजिक और वैचारिक चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत और संगठित रणनीति जरूरी है।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती सामाजिक समस्याओं, विशेषकर नशे जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई और कहा कि इनका समाधान सही समय पर सही मार्गदर्शन और इस्लामी शिक्षाओं से जुड़ाव के जरिए किया जा सकता है। इसी दिशा में “सीरत क्विज़” जैसे कार्यक्रमों को स्कूलों और कॉलेजों में बड़े स्तर पर आयोजित करने का फैसला लिया गया।
बैठक में सामाजिक सुधार पर भी जोर दिया गया, जिसमें फिजूलखर्ची, गैर-जरूरी रस्मों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही गई। वक्ताओं ने मस्जिदों, मदरसों और मकतबों को समाज के विकास का केंद्र बनाने और युवाओं को उनसे जोड़ने की जरूरत पर बल दिया।
अंत में, संगठन ने भरोसा जताया कि यह योजना जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होगी और समाज को एक नई दिशा देगी। बैठक में विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने भी अपने सुझाव और विचार साझा किए।

