भारत

आतंकवाद के झूठे आरोप में गिरफ्तार चार मुसलमानों को 3 साल बाद बाइज्ज़त बरी किया

एनआईए ने मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम, आरिफ गुलाम, मोहम्मद हुसैन को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था

अक्सर मिडिया में आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार बेगुनाह मुसलमानों के बाइज्ज़त बरी होने की खबरे आती रहती हैं. उसके बावजूद भी मुसलमानों को बदनाम किया जाता हैं।

दिल्ली की एक अदालत ने टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार चार मुसलमानों मौलाना मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम, आरिफ गुलाम बशीर धरमपुरिया और मोहम्मद हुसैन मोलानी को जुम्मेरात को बाइज़्ज़त बरी कर दिया।

इन चारों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 3 साल पहले गिरफ्तार किया था. एनआईए ने इन चारों पर पाकिस्तानी संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) से धन प्राप्त करने का आरोप लगाया था।

एनआईए का आरोप था कि यह लोग विदेशी फंडिंग के ज़रिए भारत विरोधी गतिविधियों के लिए धन एकत्रित करके अशांति पैदा करने वाला स्लीपर सेल बनाने की साजिश रच रहे थे।

विशेष न्यायाधीश परवीन सिंह ने कहा कि एनआईए ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका जिससे दुबई के रास्ते पाकिस्तान से धन भेजे जाने की बात साबित हो सके. इसलिए इन चारों को बरी किया जाता हैं।

सोशल एक्टिविस्ट शाहनवाज अंसारी के अनुसार “घी का इंतजाम हो चुका है, मुम्बई वाली पार्टी भी आएगी उनके हाथों आपको घी भेजवा देंगे.
NIA ने इस मैसेज में ‘घी’ को बम समझा और इस संदेह में चार मुसलमानों मो० सलमान, मो० सलीम, ग़ुलाम बशीर और हुसैन मोलानी को टेरर फंडिंग के आरोप में उठाया. और उनपर UAPA जैसी संगीन धारा लगा दिया।

जबकि आज ही दिल्ली की कोर्ट ने उन चारों मुसलमानों को बरी कर दिया है. और कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है- ‘शक को सबूत की जगह नहीं ले सकते’ याद रखिये हिन्दोस्तान के किसी भी कोने से कोई भी मुसलमान गिरफ्तार हो तो आप उसपर सफ़ाई नही दीजिए. क्योंकि 99% उसका गुनाह ‘मुसलमान’ होना है।

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