असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित हेट स्पीच और एक विशेष समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बयानों को लेकर गौहाटी हाईकोर्ट में एक पत्र के माध्यम से स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेने की मांग की गई है।
यह पत्र माननीय मुख्य न्यायाधीश, गौहाटी हाईकोर्ट को संबोधित किया गया है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार दिए गए सार्वजनिक बयान “मियान” या बंगाल मूल के मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत, भेदभाव और सामाजिक उत्पीड़न को बढ़ावा देने वाले हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह समुदाय पिछले 100 वर्षों से असमिया समाज का अभिन्न हिस्सा रहा है और असमिया भाषा व संस्कृति को अपनाकर मुख्यधारा में शामिल हुआ है।
पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के बयान केवल राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं हैं, बल्कि वे संविधान द्वारा प्रतिबंधित दायरे में आते हैं, जिनमें अमानवीयकरण, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की आशंका शामिल है।
विशेष रूप से एक हालिया बयान का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर लोगों को मियान समुदाय को आर्थिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया।
उदाहरण के तौर पर रिक्शा किराए में जानबूझकर कम भुगतान करने जैसी बातों को आर्थिक भेदभाव और सामाजिक अपमान की श्रेणी में बताया गया है।
पत्र में इसे शारीरिक नुकसान, आर्थिक भेदभाव और सामाजिक अपमान के लिए उकसावे के रूप में बताया गया है और कहा गया है कि इस तरह के बयान संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हैं।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कानूनी कार्रवाई करे, ताकि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत और भेदभाव को रोका जा सके और संविधान की मूल भावना की रक्षा हो सके।

