इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने सोशल मीडिया न्यूज़ प्लेटफॉर्म तेलुगुस्क्राइब के खिलाफ तेलंगाना पुलिस द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने इसे “आतंकवाद विरोधी कानून का अवैध दुरुपयोग” बताते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटना है, न कि पत्रकारिता या राजनीतिक आलोचना को दबाना।
IFF का कहना है कि सार्वजनिक हित में रिपोर्टिंग करने वाले किसी सोशल मीडिया हैंडल की सब्सक्राइबर जानकारी मांगने के लिए UAPA का इस्तेमाल करना एक गंभीर कदम है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। संस्था ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम असाधारण आपराधिक कानूनों को “हथियार” बनाकर इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं।
मामला तब सामने आया जब तेलंगाना पुलिस के खुफिया विभाग ने @TeluguScribe से जुड़ी जानकारी के लिए X (पूर्व में ट्विटर) को नोटिस जारी किया। नोटिस में आरोप लगाया गया कि इस हैंडल से “मॉर्फ्ड वीडियो, आपत्तिजनक और अश्लील भाषा” वाली सामग्री पोस्ट की गई, जो नफरत और हिंसा भड़का सकती है और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। पुलिस ने खाते से जुड़ी पंजीकरण जानकारी, उपयोग लॉग और अन्य डेटा मांगा है ताकि संबंधित व्यक्ति की पहचान कर आगे जांच की जा सके।
दूसरी ओर, तेलुगुस्क्राइब ने पुलिस की कार्रवाई को “सत्ता का दुरुपयोग” बताते हुए इसका विरोध किया है। प्लेटफॉर्म का कहना है कि उसकी सामग्री पूरी तरह कानूनी है और वह केवल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित रिपोर्टिंग करता है।
उसने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की आलोचना करने के कारण उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और पिछले ढाई वर्षों में उसके खिलाफ करीब 70 मामले दर्ज किए गए हैं।
प्लेटफॉर्म ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए नागरिक समाज, पत्रकारों और आम जनता से समर्थन की अपील की है। वहीं, यह मुद्दा अब कानून के इस्तेमाल और मीडिया की आज़ादी को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

