भारतीय मुसलमान गंभीर संकट में हैं: पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने कहा
दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल और Jamia Millia Islamia के पूर्व कुलपति Najib Jung ने भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। वरिष्ठ पत्रकार Karan Thapar को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान “बेहद गंभीर संकट” का सामना कर रहे हैं और “द्वितीय श्रेणी के नागरिक बनने की कगार पर हैं।”
डॉ. नजीब जंग ने कहा कि देश का मुस्लिम समुदाय खुद को लगातार हाशिये पर महसूस कर रहा है। उनके मुताबिक मुसलमानों को न केवल राजनीतिक स्तर पर बल्कि सामाजिक और संस्थागत स्तर पर भी अलग-थलग किए जाने का एहसास बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति “बहुत कष्टदायक” है और समाज को इस पर गंभीर आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में गिरावट का मुद्दा भी उठाया। नजीब जंग ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में होने के बावजूद हाल के चुनावों में भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद पहली बार केंद्र सरकार में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है और भाजपा का कोई निर्वाचित मुस्लिम सांसद भी नहीं है।
पूर्व एलजी ने कहा कि कभी नौकरशाही, न्यायपालिका और अन्य प्रमुख संस्थानों में मुसलमानों की उल्लेखनीय भागीदारी हुआ करती थी, लेकिन अब उनकी मौजूदगी लगातार कम होती जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि करीब 20 करोड़ आबादी वाले समुदाय के वोट अगर सत्ताधारी दल के लिए महत्वहीन हो जाएं, तो यह लोकतंत्र और सामाजिक संतुलन दोनों के लिए चिंताजनक संकेत है।
नजीब जंग के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने उनके बयान को देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर चेतावनी बताया है, जबकि भाजपा और उसके समर्थक पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

