Asaduddin Owaisi ने नासिक टीसीएस मामले को लेकर चल रही मीडिया कवरेज और राजनीतिक बयानबाज़ी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत में तय होना चाहिए, न कि टीवी डिबेट और सार्वजनिक आरोपों के जरिए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि “लव जिहाद” का नैरेटिव बनाकर शिक्षित मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है।
छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि मामले में कुल नौ एफआईआर दर्ज हैं और अदालत से पहले किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने कहा, “हम इस मीडिया ट्रायल की निंदा करते हैं। फैसला केवल अदालत करेगी।” ओवैसी ने दावा किया कि अंततः न्यायपालिका आरोपियों को निर्दोष पाएगी।
ओवैसी ने कहा कि आरोपी निदा खान टीसीएस के एचआर विभाग में नहीं थीं और शिकायत दर्ज होने से पहले ही उनका तबादला हो चुका था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता के संबंध सत्तारूढ़ दल से जुड़े हुए हैं।
साथ ही पुलिस द्वारा तलाशी में बुर्का, हिजाब और धार्मिक किताबें मिलने को मुद्दा बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “हर मुस्लिम घर में ये चीजें होती हैं। बुर्का पहनना कब से गैरकानूनी हो गया?”
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि केवल आरोप लग जाने से कोई व्यक्ति दोषी साबित नहीं हो जाता। उन्होंने 2006 के 2006 Malegaon bombings और 2006 Mumbai train bombings मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कई लोग वर्षों बाद बरी हुए, लेकिन तब तक उनकी ज़िंदगी बर्बाद हो चुकी थी।
इस बीच विवाद तब और बढ़ गया जब पुलिस ने आरोप लगाया कि एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल ने निदा खान को शरण दी थी। इस मामले में उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। वहीं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री Sanjay Shirsat ने इसे “लव जिहाद” की साजिश बताते हुए विशेष जांच दल (SIT) से जांच की मांग की है।
फिलहाल नासिक पुलिस टीसीएस कार्यालय में कथित उत्पीड़न और धर्मांतरण प्रयासों से जुड़ी कई शिकायतों की जांच कर रही है। मामले को लेकर राज्य की राजनीति गर्म हो गई है, जहां सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है।

