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गाजा: सहायता लेकर पहुंचे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को इज़राइल ने हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया, दुनिया भर में उठे सवाल

ने गाजा के लिए रवाना हुए ‘ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला’ के सैकड़ों विदेशी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद अब उन्हें डिपोर्ट करना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई को लेकर कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इज़राइल की कड़ी आलोचना की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा की ओर बढ़ रहे 50 से अधिक जहाजों को रोका था। इसके बाद करीब 430 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। इनमें तुर्की, फ्रांस, स्पेन, जॉर्डन और कई अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।

तुर्की पहुंचने वाले कई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें हथकड़ियों और पैरों में जंजीरों के साथ रखा गया और भोजन-पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए भी तरसाया गया।

बेल्जियम के कार्यकर्ता जूलियन कैब्राल ने दावा किया कि इज़राइली सैनिकों ने उन्हें पीटा, जबकि इटली के पत्रकार एलेस्सांद्रो मंतोवानी ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को “वेलकम टू इज़राइल” कहकर लात-घूंसों से मारा गया।

इस पूरे मामले के बाद कई देशों ने इज़राइल के राजदूतों को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री के व्यवहार को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं का मजाक उड़ाया गया था। बाद में ने भी कहा कि बेन-ग्विर का व्यवहार “इज़राइल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं” था।

मानवाधिकार संगठन अदाला ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं के साथ किया गया व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का उल्लंघन है।

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