जम्मू-कश्मीर के सिधरा इलाके में चलाए गए बुलडोजर अभियान के बाद दर्जनों गुर्जर-बकरवाल आदिवासी मुस्लिम परिवार बेघर हो गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कथित वन अतिक्रमण हटाने के लिए की गई, जबकि स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं ने इसे गरीब और कमजोर मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाने वाला कदम बताया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार सुबह भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ प्रशासन रायका बांदी इलाके में पहुंचा और करीब 32 घरों को ध्वस्त कर दिया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान तक निकालने का समय नहीं दिया गया और बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग घरों के अंदर ही मौजूद थे।
जम्मू-कश्मीर के वन एवं जनजातीय मामलों के मंत्री ने इस कार्रवाई को “क्रूर और लक्षित बेदखली” बताते हुए कहा कि गुर्जर-बकरवाल समुदाय को डराने और हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और मामले की जांच की मांग की।
पीडीपी नेता ने भी मौके का दौरा कर कहा कि भीषण गर्मी में छोटे-छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान लोगों का घरेलू सामान और कुरान शरीफ की प्रतियां तक फेंक दी गईं।
इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में अतिक्रमण विरोधी अभियानों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कार्रवाई चुनिंदा तौर पर मुस्लिम बहुल और आदिवासी इलाकों में की जा रही है।

