दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में एक कथित मदरसे की चारदीवारी तोड़े जाने की घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक करनैल सिंह ने समर्थकों और हिंदुत्व संगठनों से जुड़े लोगों के साथ मिलकर निर्माणाधीन दीवार को ध्वस्त कर दिया।
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग नारेबाजी करते और दीवार तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह घटना 21 मई को हुई, जब करनैल सिंह करीब 80 से 100 लोगों के साथ मौके पर पहुंचे।
विधायक का दावा है कि यह निर्माण दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर बनाए गए एक “अवैध मदरसे” का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद उन्हें खुद कदम उठाना पड़ा। घटना के दौरान वह कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे।
स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान भीड़ द्वारा मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। कुछ लोगों का कहना है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी “आतंकवादी” कहा गया।
घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस जारी है। हालांकि पुलिस का बयान विधायक के दावों से अलग है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार विवादित निर्माण केवल चार से पांच फुट ऊंची चारदीवारी थी, जो पिछले दो महीनों में बनाई गई थी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के स्वामित्व को लेकर मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
करनैल सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो साबित करते हैं कि जमीन डीडीए की है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं और किसी भी परिणाम से डरते नहीं हैं। दूसरी ओर, विवादित स्थल से कुछ दूरी पर स्थित मस्जिद समिति ने खुद को इस निर्माण से अलग बताते हुए कहा कि ध्वस्त की गई दीवार से उनका कोई संबंध नहीं था।
घटना के वीडियो सार्वजनिक होने और बड़ी भीड़ के शामिल होने के बावजूद पुलिस ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले की भी चर्चा हो रही है जिसमें बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के की गई बुलडोजर कार्रवाई को असंवैधानिक बताया गया था।

