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चुनाव के दौरान हम भारतीय थे, अब हमें बांग्लादेशी कहा जा रहा है: बांद्रा में बुलडोजर कार्रवाई से बेघर हुए लोगों ने कहा

मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास स्थित गरीब नगर में पश्चिमी रेलवे द्वारा चलाए गए बड़े पैमाने के अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद सैकड़ों मुस्लिम और दलित परिवार बेघर हो गए हैं।

बुलडोजर कार्रवाई के बाद पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया है और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें “बांग्लादेशी” और “रोहिंग्या” कहकर अपमानित किया गया।

19 मई को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रेलवे सुरक्षा बल और प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर गरीब नगर पहुंचे। करीब 48 घंटों के भीतर बस्ती का बड़ा हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया।

स्थानीय निवासियों के अनुसार 500 से अधिक घरों, दुकानों और दो मस्जिदों पर कार्रवाई हुई है। इलाके की बिजली और पानी की सप्लाई भी काट दी गई है और अब तक पुनर्वास की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है।

स्थानीय निवासी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि लोग अपना सामान तक ठीक से नहीं बचा सके। उनका कहना है कि पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण लोगों को जल्दबाजी में घर खाली करने पड़े और कई परिवारों का सामान मलबे में दब गया। वहीं 55 वर्षीय रशीदा, जो पिछले तीन दशकों से गरीब नगर में रह रही हैं, अब पुल के नीचे अपने परिवार और सामान के साथ रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन अब उन्हें वहां से भी हटने के लिए कह रहा है, जबकि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और मीडिया के कुछ हिस्सों द्वारा उन्हें “बांग्लादेशी” और “रोहिंग्या” कहा गया। लोगों ने अपने वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड और पुराने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि वे दशकों से मुंबई में रह रहे भारतीय नागरिक हैं।

स्थानीय निवासी मुनव्वर शेख ने कहा कि चुनावों के दौरान राजनीतिक दल वोट मांगने आते हैं, लेकिन अब वही लोग उन्हें अवैध बता रहे हैं।

कार्रवाई के दौरान इलाके की दो पुरानी मस्जिदें — मस्जिद-ए-इनाम और फैज़ान-ए-मुस्तफा गरीब नगर मस्जिद — भी ध्वस्त कर दी गईं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि मस्जिदों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा और इनके लिए कोई अलग नोटिस भी जारी नहीं किया गया था। निवासियों का कहना है कि बुलडोजर पहुंचने पर उन्हें कुरान और मस्जिद का सामान निकालने के लिए केवल कुछ मिनट दिए गए।

मस्जिदों को गिराए जाने के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो बाद में हिंसक झड़पों में बदल गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुलिस ने महिलाओं और बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों को लोगों को पीटते और घसीटते हुए देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और नाबालिगों सहित करीब 50 से 60 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गरीब नगर से सटे पम्पापुरा इलाके में भी कार्रवाई की गई, जहां बड़ी संख्या में दलित और मुस्लिम परिवार रहते थे। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विरोध करने वालों को पुलिस ने हिरासत में लिया और कई लोगों के साथ मारपीट की गई। इलाके में मौजूद एक अंबेडकरवादी समूह के कार्यालय को भी तोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर और प्रतिमा भी बुलडोजर कार्रवाई में क्षतिग्रस्त हो गई।

जून में मुंबई में मानसून शुरू होने वाला है, लेकिन सैकड़ों परिवार फिलहाल फुटपाथों, पुलों के नीचे और रेलवे ट्रैक के किनारे रहने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें अब तक न तो कोई वैकल्पिक आवास मिला है और न ही प्रशासन की ओर से राहत। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई बांद्रा टर्मिनस के विस्तार, सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अभियान ने गरीब परिवारों की पूरी जिंदगी उजाड़ दी है।

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