गुजरात के अहमदाबाद स्थित वेजलपुर इलाके में एक मुस्लिम युवक के साथ कथित हिरासत यातना और सार्वजनिक मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गुजरात अल्पसंख्यक समन्वय समिति (एमसीसी) ने इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को कानूनी नोटिस जारी किया है।
नोटिस मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक और अहमदाबाद पुलिस आयुक्त को भेजा गया है। यह मामला 7 मई को वेजलपुर के सोनल सिनेमा इलाके में हुई एक घटना से जुड़ा है।
आरोप है कि पशु हत्या के शक में पकड़े गए एक मुस्लिम युवक मोहम्मद अजीज शेख उर्फ रईस शेख को पुलिस ने सार्वजनिक रूप से बेरहमी से पीटा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में युवक के हाथ पुलिस वाहन के बोनट से बांधे हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि पुलिसकर्मी उसे लाठियों से मारते नजर आ रहे हैं।
गुजरात अल्पसंख्यक समन्वय समिति ने अपने कानूनी नोटिस में इस घटना को “अवैध और गैर-न्यायिक दंड” बताया है। समिति का कहना है कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो प्रत्येक नागरिक को जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा का अधिकार देता है। एमसीसी संयोजक मुजाहिद नफीस ने सवाल उठाया कि पुलिस को किसी आरोपी को अदालत से पहले सार्वजनिक रूप से अपमानित और प्रताड़ित करने का अधिकार किसने दिया।
मुजाहिद नफीस ने कहा कि यदि आरोपी ने कोई अपराध किया भी है तो सजा तय करने का अधिकार केवल कानून और अदालत को है, न कि पुलिस को। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो और मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई है।
समिति ने मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय, अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है। नोटिस में हिरासत में हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत निगरानी और जवाबदेही तंत्र लागू करने की भी अपील की गई है।

