गुजरात हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय जहीर शेख की कथित हिरासत में मौत के मामले में पुलिस के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि पुलिस यह नहीं कह सकती कि “हम अपनी मर्जी से जांच करेंगे लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं करेंगे।”
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति डी.एन. रे ने जहीर शेख के बेटे तोफिक शेख द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने पुलिस से सवाल किया कि जब एफआईआर ही दर्ज नहीं की गई, तो आखिर किस आधार पर जांच की जा रही है। न्यायमूर्ति रे ने कहा कि किसी भी आरोप की जांच से पहले एफआईआर दर्ज करना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि पुलिस ने दुर्घटनाजनित मौत के मामले में बीएनएसएस की धारा 196 के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन शिकायतकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा। इस पर अदालत ने पुलिस के “हठी रवैये” की आलोचना करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज किए बिना जांच आगे नहीं बढ़ सकती।
जहीर शेख के परिवार का आरोप है कि उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया। परिवार के मुताबिक पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और उनकी दाढ़ी तक खींची। जहीर शेख मधुमेह समेत कई बीमारियों से पीड़ित थे।
यह मामला अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके में कथित गोमांस बरामदगी केस से जुड़ा है। पुलिस का दावा है कि 5 मई को छापेमारी के दौरान करीब 520 किलो संदिग्ध मांस बरामद किया गया था। पुलिस के अनुसार जहीर शेख को 16 मई को हिरासत में लिया गया और बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस लगातार उन्हें डराने और परेशान करने की कोशिश कर रही है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 मई को होगी।

