असम के गोलपारा जिले में पांच मुस्लिम छात्रों के खिलाफ प्रस्तावित निष्कासन की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने इस मामले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा शासन में अब स्कूल के बच्चे भी भय, भेदभाव और ध्रुवीकरण की राजनीति से अछूते नहीं रहे हैं।
सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा और बेहतर माहौल देना है, लेकिन उन्हें बहिष्कार और पूर्वाग्रह का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि असम में भाजपा सरकार के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ भेदभाव का माहौल पैदा किया जा रहा है।
यह मामला उस समय सामने आया जब गोलपारा जिले के एक सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के पांच मुस्लिम छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और निष्कासन का खतरा मंडराने लगा।
आरोप है कि एक छात्र टिफिन बॉक्स में गोमांस लेकर स्कूल पहुंचा था। घटना के बाद एक नाबालिग छात्र को हिरासत में लिया गया, जबकि उसकी विधवा मां को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला स्कूली बच्चों से जुड़ा था तो एक नाबालिग को हिरासत में लेने और उसकी मां को गिरफ्तार करने की क्या जरूरत थी। उन्होंने पूछा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर छात्रों को निष्कासित करने की कार्रवाई को कैसे उचित ठहराया जा सकता है।
हुसैन ने राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और असम के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों, गरिमा, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस बीच, स्कूल प्रशासन और स्थानीय संगठनों द्वारा छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किए जाने की खबरों ने बहस को और तेज कर दिया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।

