भारत में फ़िलिस्तीन के दूतावास ने एक प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया है कि इज़राइल द्वारा लगाए गए वित्तीय प्रतिबंधों और राजस्व रोकने की नीति के कारण फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रही है। दूतावास के अनुसार हालात इतने खराब हो चुके हैं कि हजारों मरीजों की जान खतरे में पड़ गई है और स्वास्थ्य तंत्र के ढहने का खतरा मंडरा रहा है।
बयान में कहा गया है कि 4 जून को फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी जारी करते हुए बताया था कि आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री का भंडार तेजी से खत्म हो रहा है।
मंत्रालय के अनुसार 520 आवश्यक दवाओं में से 180 पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। वहीं कैंसर उपचार में उपयोग होने वाली 97 दवाओं में से 50 उपलब्ध नहीं हैं, जिससे 4,000 से अधिक कैंसर मरीज सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
फ़िलिस्तीनी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि किडनी डायलिसिस मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं और लैब सामग्री की भारी कमी पैदा हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस वर्ष 1 जून तक केवल 19,500 सर्जरी हो सकी हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में लगभग 65,000 सर्जरी की गई थीं। 11,000 से अधिक निर्धारित ऑपरेशन टाल दिए गए हैं, जिससे हजारों मरीजों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
दूतावास ने कहा कि यह संकट इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनी कर एवं राजस्व राशि रोके जाने से और गहरा हुआ है। इसके कारण स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए वित्तीय संसाधन कम पड़ गए हैं और अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
हाल के महीनों में फ़िलिस्तीनी प्रशासन भी आर्थिक संकट और सार्वजनिक सेवाओं के कमजोर होने की बात कह चुका है।
फ़िलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, दानदाता देशों और मानवीय संस्थाओं से तत्काल सहायता की अपील की है। मंत्रालय का कहना है कि जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति के लिए 5 करोड़ डॉलर और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने के लिए अतिरिक्त 5 करोड़ डॉलर की आवश्यकता है।
अपने बयान के अंत में फ़िलिस्तीन ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही तो स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप कर फ़िलिस्तीनी मरीजों के जीवन और उपचार के अधिकार की रक्षा करने की मांग की।

