महाराष्ट्र के सांगली जिले के अराला गांव में कथित भीड़ हिंसा के बाद पलायन करने वाले मुस्लिम परिवार प्रशासन और पुलिस के आश्वासन के बाद वापस अपने घर लौट आए हैं।
परिवारों का कहना है कि अप्रैल में हुए हमले और उसके बाद की परिस्थितियों के कारण वे गांव छोड़ने को मजबूर हुए थे, लेकिन अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और सुरक्षा का भरोसा दिए जाने पर उन्होंने वापसी का फैसला किया।
पीड़ित आबिद हुसैन डांगे और उनके परिवार का आरोप है कि 28 अप्रैल को उनकी चिकन दुकान पर हुए विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उन पर हमला कर दिया।
उनका दावा है कि हमलावरों ने धार्मिक नारे लगाए, पत्थरबाजी की और परिवार के कई सदस्यों को घायल कर दिया। डांगे का कहना है कि हमले के दौरान उनके भाई पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला भी किया गया।
परिवारों ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया और शिकायत दर्ज कराने में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पीड़ितों का आरोप है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, जबकि कुछ लोगों को राजनीतिक प्रभाव के कारण संरक्षण मिला। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
डांगे परिवार के अनुसार, आरोपियों को जमानत मिलने के बाद गांव में कथित रूप से धमकी भरे जुलूस और नारेबाजी की गई, जिससे मुस्लिम परिवारों में भय का माहौल पैदा हो गया। इसी के बाद 8 से 10 मुस्लिम परिवारों ने गांव छोड़ने का निर्णय लिया था। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर सुरक्षा और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार वापस लौट आए।
मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की लोक शिकायत प्रकोष्ठ में भी शिकायत भेजी गई है। शिकायत में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने, पुलिस की भूमिका की जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि उन्हें न्याय तथा सुरक्षा दोनों मिलेगी।

