असम के कार्बी आंगलोंग ज़िले में 2018 में हुई मॉब लिंचिंग के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नगांव की एक विशेष अदालत ने 20 दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है, जबकि सबूतों के अभाव में 25 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
यह मामला 8 जून 2018 की उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जब भीड़ ने बच्चा चोरी की अफवाह के चलते दो युवकों—अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास—को घेरकर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। दोनों पिकनिक से लौट रहे थे और स्थानीय लोगों ने उन्हें संदिग्ध समझ लिया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों का इरादा स्पष्ट था और उन्होंने दोनों युवकों को तब तक पीटा जब तक उनकी मौत नहीं हो गई। हालांकि, अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” नहीं मानते हुए मौत की सज़ा देने से इनकार कर दिया और सभी दोषियों को उम्रकैद के साथ 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
पीड़ित परिवार इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। नीलोत्पल दास के पिता ने कहा कि सज़ा अपराध की गंभीरता के अनुसार होनी चाहिए और वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि आरोपियों पर हत्या (धारा 302) नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) का मामला बनता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
गौरतलब है कि यह मामला हत्या, दंगा और गैरकानूनी जमावड़े सहित कई धाराओं में दर्ज किया गया था। करीब आठ साल बाद आए इस फैसले पर देरी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

