अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलीगढ़ दौरे के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अज़ान पर कथित रूप से अस्थायी रोक लगाए जाने के आरोपों के बाद विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है।
छात्रों का दावा है कि 22 जून को मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर परिसर की कई मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अज़ान प्रसारित नहीं की गई। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्हें मस्जिद के इमाम ने बताया कि यह प्रशासन के निर्देश पर किया गया था।
एएमयू मस्जिदों के नाज़िम प्रोफेसर मोहम्मद राशिद ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि लाउडस्पीकर पर अज़ान रोकी गई थी और उनका मानना है कि जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नमाज़ सामान्य रूप से अदा की गई थी।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। एएमयू के प्रॉक्टर ने कहा कि अज़ान पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई और इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।
अलीगढ़ पुलिस ने भी छात्रों के दावों का खंडन करते हुए कहा कि न तो कोई ऐसा आदेश जारी किया गया और न ही किसी मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाए गए।
इस बीच एलएलएम छात्र और अधिवक्ता सैयद कैफ हसन ने कुलपति के नाम एक खुला पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यदि सुरक्षा संबंधी कोई चिंता थी, तो धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी।
फिलहाल इस मामले में कोई सार्वजनिक आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है, जिसके कारण यह विवाद छात्रों के आरोपों और प्रशासन के खंडन के बीच बना हुआ है।

